ज्ञानपथ भारत

ज्ञानं परमं ध्येयम् — ज्ञान, विचार, संस्कृति और आत्म-बोध की पत्रिका
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लेखन दिशानिर्देश

गुणवत्तापूर्ण और सुसंगत सामग्री के लिए हमारे मानक।

भाषा और शैली

लेख शुद्ध, सहज हिंदी में लिखे जाने चाहिए। संस्कृतनिष्ठ शब्दों का प्रयोग तभी करें जब वे विषय के अनुरूप हों — पाठक को उलझाने के बजाय समझाने पर ज़ोर दें। तकनीकी या दार्शनिक शब्दों का प्रयोग करते समय संक्षेप में उनका अर्थ भी स्पष्ट करें।

संरचना

  • शीर्षक स्पष्ट, संक्षिप्त और जिज्ञासा जगाने वाला हो
  • पहला अनुच्छेद पाठक को विषय में तुरंत जोड़े
  • लंबे लेखों को उप-शीर्षकों (H2/H3) में बाँटें
  • जहाँ उपयुक्त हो, वहाँ सूची या उदाहरण का प्रयोग करें
  • लेख के अंत में संक्षिप्त निष्कर्ष या पाठक के लिए विचार-बिंदु दें

शब्द-सीमा

मुख्य आलेख (article) के लिए 1200-2000 शब्द उपयुक्त हैं। ब्लॉग-शैली के लेखों के लिए 600-900 शब्द पर्याप्त हैं। संपादकीय चयन के लेख इससे अधिक लंबे भी हो सकते हैं, बशर्ते विषय की गहराई इसकी माँग करे।

तथ्य और संदर्भ

ऐतिहासिक तिथियाँ, वैज्ञानिक दावे, आयुर्वेदिक या स्वास्थ्य-संबंधी जानकारी और शास्त्रों के उद्धरण — इन सभी के लिए विश्वसनीय स्रोत का उल्लेख आवश्यक है। मौलिक शोध और उद्धरण के बीच स्पष्ट अंतर रखें।

क्या न करें

  • किसी अन्य प्रकाशन से सामग्री की नकल या भारी पैराफ्रेज़ न करें
  • किसी समुदाय, जाति या धर्म के विरुद्ध पूर्वाग्रह न फैलाएँ
  • असत्यापित चिकित्सीय दावे या नुस्खे न दें
  • व्यक्तिगत विज्ञापन या प्रचार सामग्री न जोड़ें

प्रस्तुतीकरण

लेख को .docx या सादे टेक्स्ट प्रारूप में भेजें। यदि चित्र संलग्न कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके पास उनके उपयोग का अधिकार है और स्रोत स्पष्ट रूप से बताया गया है।